रेज़िस्टेंस लेवल क्या होता है

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Updated On: 27-06-2022

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क्या होता है वाटर रेसिस्टेंस या वाटरप्रूफ स्मार्टफोन, यहां जानें सबकुछ

अधिकांश लोग टर रेसिस्टेंस या वॉटरप्रूफ या वॉटर रिपेलेंट फोन के अंतर को नहीं समझते. इनकी जानकारी होना जरूरी है नहीं आपको नुकसान हो सकता है.

By: एबीपी न्यूज़ | Updated at : 06 Dec 2020 06:49 PM (IST)

अगर आप वाटर रेसिस्टेंस या वाटरप्रूफ या वाटर रिपेलेंट स्मार्टफोन लेन का मन बना रहे हैं तो इन तीनों के बारे में पूरी जानकारी होना जरूरी है. अधिकांश लोग इनके बीच का अंतर नहीं समझते लेकिन यह जानना जरूरी है नहीं तो आपको नुकसान हो सकता है.

वाटर रेसिस्टेंट सबसे पहले यह जान लें रेज़िस्टेंस लेवल क्या होता है कि वाटर रेसिस्टेंट का मतलब वाटर प्रूफ नहीं होता है. सच तो यह है कि बहुत कम इलेक्ट्रॉनिक्स सही अर्थों में वाटर प्रूफ होते हैं. डिवाइस के वाटर रेसिस्टेंट होने का मतलब होता है कि फोन के अंदर पानी का जाना काफी मुश्किल है. वाटर रेसिस्टेंट से लैस स्मार्टफोन्स का भी मतलब यही है कि पानी की कुछ बूंदें पड़ने से कोई नुकसान नहीं होता. इसका मतलब यह नहीं फोन पानी में डूब गया तो इसे कुछ नहीं होगा.

आईपी रेटिंग्स वाटर रेसिस्टेंट फोन की डिवाइस के लिए एक रेटिंग का इस्तेमाल होता है जिसे आईपी रेटिंग्स कहते हैं. आईपी रेटिंग्स एक से नौ तक होती हैं और नौ सबसे अच्छा माना जाता है.

वाटर रेसिस्टेंस रेटिंग्स केवल कुछ ही परिस्थितियों में लागू होती है और ये दुनिया में मिलना बहुत मुश्किल हैं. दरअसल आईपी रेटिंग्स को प्रयोगशालाओं में किए गए प्रयोग के आधार पर एक से नौ तक मापा जाता है जबकि बाहरी दुनिया के हालात काफी अलग होते हैं. इसे ऐसे समझें कि प्रयोगशाला में फ्रेश वाटर का इस्तेमाल में लाया जाता है. लेकिन बाहर के पानी रेज़िस्टेंस लेवल क्या होता है में कई तरह के सॉल्ट और केमिकल होते हैं.

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वाटर रिपेलेंट वाटर रिपेलेंट तकनीकी मे फोन या डिवाइस पर एक पतली फिल्म चढ़ाई जाती है, जो पानी को फोन में नहीं जाने देती. डिवाइस में इस फिल्म को अंदर और बाहर दोनों ओर से लगाया जाता है. वाटर रिपेलेंट तकनीक के लिए अधिकतर हाइड्रोफोबिक सतह तैयार की जाती है. इस तकनीक की मदद से कोई डिवाइस सामान्य डिवाइस की तुलना में ज्यादा देर पानी में सुरक्षित रह सकता है.

वाटरप्रूफ वाटरप्रूफ सर्टिफिकेशन वाले स्मार्टफोन फोन पानी में सुरक्षित है. इस फोन को पानी के अंदर फोटोग्राफी के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है.

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Published at : 06 Dec 2020 06:49 PM (IST) Tags: water repellent Water resistance waterproof phone smartphone Mobile हिंदी समाचार, ब्रेकिंग न्यूज़ हिंदी में सबसे पहले पढ़ें abp News पर। सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट एबीपी न्यूज़ पर पढ़ें बॉलीवुड, खेल जगत, कोरोना Vaccine से जुड़ी ख़बरें। For more related stories, follow: Technology News in Hindi

Diabetes: सिर्फ 3 घंटे में डायबिटीज मरीजों का ब्लड शुगर कंट्रोल करेगा ये जूस, एक्सपर्ट का दावा

Diabetes रेज़िस्टेंस लेवल क्या होता है Control Tips: डायबिटीज की समस्या आजकल काफी आम हो गई है. इसका मुख्य कारण गलत खान-पान और लाइफस्टाइल है. डायबिटीज की समस्या होने पर शरीर में ब्लड शुगर लेवल बढ़ने लगता है. ऐसे में जरूरी होता है कि डाइट में ऐसी चीजों को शामिल किया जाए जिससे बल्ड शुगर लेवल को कम किया जा सकें.

Diabetes: डायबिटीज के मरीज रोजाना करें इस ड्रिंक का सेवन, कम होगा ब्लड शुगर लेवल (Photo Credit: Pixabay)

Diabetes: डायबिटीज के मरीज रोजाना करें इस ड्रिंक का सेवन, कम होगा ब्लड शुगर लेवल (Photo Credit: Pixabay)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 14 फरवरी 2022,
  • (अपडेटेड 14 फरवरी 2022, 10:09 AM IST)
  • डायबिटीज होने पर ब्लड शुगर का लेवल काफी ज्यादा बढ़ने लगता है
  • डायबिटीज में हमारे खानपान का अहम रोल होता है

Diabetes: आजकल के समय में डायबिटीज एक आम समस्या बन चुकी है. गलत खानपान और लाइफस्टाइल के चलते यह समस्या काफी बढ़ने लगी है. डायबिटीज होने पर शरीर में ब्लड शुगर का लेवल काफी ज्यादा बढ़ जाता है. हम जब खाना खाते हैं तो शरीर को ग्लूकोज प्राप्त होता है. इस ग्लूकोज का इस्तेमाल कोशिकाएं शरीर को ऊर्जा प्रदान करने के लिए करती हैं. शरीर में इंसुलिन ना होने से ये अपना काम सही तरीके से नहीं कर पाती हैं, जिससे कोशिकाओं को ग्लूकोज नहीं मिल पाता. यह ग्लूकोज हमारे ब्लड में जमा होने लगता है. डायबिटीज होने पर शरीर के लिए भोजन से एनर्जी को बनाना काफी मुश्किल हो जाता है. इससे शरीर में ग्लूकोज का स्तर बढ़ने लगता है. अगर आप भी डायबिटीज के मरीज हैं तो हम आपको एक ऐसी ड्रिंक के बार में बताने जा रहे हैं जिसे पीने से आपके शरीर में ग्लूकोज के स्तर के बढ़ने से रोका जा सकता है.

डायबिटीज के प्रकार

- टाइप-1 डायबिटीज
- टाइप-2 डायबिटीज
- जेस्टेशनल डायबिटीज (प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली हाई ब्लड शुगर की समस्या)

अगर बात टाइप 2 डायबिटीज की करें तो इसमें हमारे खानपान का अहम रोल होता है. कुछ खाद्य पदार्थों का जीआई लेवल काफी ज्यादा होता है जिससे आपके शरीर में ग्लूकोज का स्तर काफी बढ़ सकता है. जीआई से खाद्य पदार्थों में कार्बोहाइड्रेट कंटेंट की वैल्यू और ब्लड ग्लूकोज लेवल पर पड़ने वाले उसके प्रभाव का पता चलता है. हालांकि कुछ चीजें ऐसी हैं जिनका जीआई लेवल कम होता है, जिसमें अनार का जूस भी शामिल है.

नूट्रिशनिस्ट रॉब हॉब्सन ने Express.co.uk को बताया कि एक शोध के मुताबिक, अनार का जूस मात्र 3 घंटे में ब्लड शुगर लेवल को कम कर सकता है. लेकिन यह अभी भी पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है. रॉब हॉब्सन का कहना है कि अनार के जूस में उच्च मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं. इसमें ग्रीन टी के मुकाबले तीन गुना अधिक एंटीऑक्सीडेंट होते हैं.

रॉब हॉब्सन ने कहा कि ये एंटीऑक्सीडेंट मुख्य रूप से फ्लेवोनॉइड होते हैं और इसमें और भी अलग-अलग चीजें शामिल होती हैं, लेकिन ऐसा लगता है कि इसमें एंथोसायनिन होता है जो इसे गहरा लाल रंग देत है. रॉब हॉब्सन ने बताया कि रिसर्चर्स का मानना है कि ये एंटीऑक्सीडेंट्स कहीं ना कहीं चीनी के साथ बंध जाते हैं और इंसुलिन लेवल पर ज्यादा असर डालने से बचाते हैं.

एक स्टडी में यह बात भी सामने आई है कि अनार का जूस डायबिटीज के मरीजों के इंसुलिन रेजिस्टेंस (insulin resistance) के खतरे को कम करता है. रॉब हॉब्सन ने बताया इंसुलिन रेजिस्टेंस तब होता है जब आपकी मांसपेशियों और लीवर में मौजूद कोशिकाएं इंसुलिन का जवाब नहीं देती हैं, इसलिए वह खून से ग्लूकोज को आसानी से नहीं ले पातीं.

उन्होंने कहा कि ग्लूकोज जब खून में जमा हो जाता है तो यह काफी खतरनाक साबित हो सकता है. इससे शरीर की कोशिकाएं मरने लगती हैं. ऐसे में डायबिटीज के एक से अधिक पहलुओं के लिए यह रेड ड्रिंक काफी फायदेमंद मानी जाती है.

कितना करना चाहिए अनार के जूस का सेवन

रॉब हॉब्सन ने कहा, एक दिन में एक गिलास अनार का जूस पीना आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है. इसके अलावा हॉब्सन ने यह भी बताया कि, अगर आप इसका पूरा फायदा पाना चाहते हैं तो मार्केट से इस जूस को लाते समय ख्याल रखें कि उसमें किसी भी चीज की मिलावट नहीं होनी चाहिए और वह बिल्कुल शुद्ध होना चाहिए. मार्केट में आजकल अनार के जूस में भी कई तरह के फ्लेवर्स उपलब्ध होते हैं. इनमें पानी और चीनी की मात्रा काफी अधिक होती है. एक बात के बारे में उन्होंने चेतावनी भी दी कि अध्ययनों में इस बात का पता नहीं लग पाया है कि क्या आप इस जूस को डायबिटीज की दवाई मेटफॉर्मिन के साथ पी सकते हैं या नहीं. ऐसे में इसे पीने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें.

इसके अलावा, जर्नल एल्सेवियर में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक, अनार के जूस पीने से ब्लड शुगर लेवल रेज़िस्टेंस लेवल क्या होता है को कम किया जा सकता है. विशेषज्ञों के मुताबिक, अनार के जूस का सेवन ब्लड शुगर के स्तर को कम करने में फायदेमंद हो सकता है. इस अध्ययन में 12 घंटे के भूखे रहने के बाद डायबिटीज से पीड़ित 85 रोगियों के ब्लड सैंपल लिए गए. इसके बाद 1.5 मिली अनार के जूस के सेवनके एक से तीन घंटे बाद फिर सैंपल जांच किए गए. शोधकर्ताओं मे पाया कि तीन घंटे के बाद लिए गए सैंपल में ब्लड शुगर लेवल में कमी आई.

why charcoal and salt used for earthing | अर्थिंग में नमक, चारकोल क्यों डालते हैं

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जब भी आप अर्थिंग के बारे में पढ़ते हैं तो एक सवाल आपके मन में जरूर आता होगा कि जब हम अर्थिंग पिट बनाते हैं तो उसमें चारकॉल और नमक क्यों डाला जाता है। अगर आप इलेक्ट्रिकल से जुड़े हैं या इलेक्ट्रिकल की पढ़ाई कर रहे हैं तो आपके लिए ये बहुत ही जरूरी प्रशन है, और इससे भी जरूरी इसका उत्तर जानना जरूरी है।

चारकोल और नमक डालने की जरूरत क्यों

इसको जानने से पहले हमको ये समझने की जरुरत पड़ेगी कि इसमें चारकोल और नमक डालने की जरूरत ही क्यों पड़ती है, जैसा कि आपको पता है जहां भी इलेक्ट्रिकल सिस्टम लगाया जाता है वहां समय समय पर अर्थिंग का प्रतिरोध (Resistance) चेक करने की जरूरत होती है, यानी अर्थिंग का प्रतिरोध (Resistance) कम है के नहीं यह हमें बार-बार देखने की जरूरत होती है

क्योंकि इसको हमे कम से कम लेवल पे बनाये रखने की जरूरत होती है। हालांकि इसका लेवल जीरो नही हो सकता फिर भी इसका लेवल ज्यादा से ज्यादा 5 ohm से ऊपर नही होना चाहिए। 0 से 5 के बीच इसका लेवल हमारे इलेक्ट्रिकल सिस्टम की सक्रियता पे निर्भर करता है।

अगर रेज़िस्टेंस लेवल क्या होता है आप ये सोच रहे हैं के ये प्रतिरोध (Resistance) अर्थिंग के लिए इस्तेमाल किये जाने वाले अर्थिंग इलेक्ट्रोड जैसे पाइप अर्थिंग और प्लेट अर्थिंग में इस्तेमाल होने वाले पाइप और प्लेट का होता है तो आप गलत हैं। ये जो लेवल 5 ohm तक होता है वो अर्थिंग के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले इलेक्ट्रोड और जहां पर अर्थिंग कि जाती है उस जमीन की मिट्टी का दोनों का मिला के कंबाइन प्रतिरोध होता है, इसी को अर्थिंग रेजिस्टेंस कहते हैं।

इसका मतलब ये हुआ कि जिस जमीन में हम अर्थिंग कर रहे हैं अगर उसका प्रतिरोध ज्यादा हुआ और उसमें हमने अर्थिंग की है तो ऐसे में हमारे इलेक्ट्रिकल सिस्टम में कोई खराबी आ जाती है तो यह हमारे और हमारे इलेक्ट्रिकल सिस्टम के लिए बहुत ही खतरनाक साबित हो सकता है। तो इसी कारण अर्थिंग इलेक्ट्रोड के साथ हमारी जमीन का प्रतिरोध भी कम करना होता है।

अब इसको हम कैसे कम करेंगे यही रेज़िस्टेंस लेवल क्या होता है समझने वाली बात है। तो जब भी हम अर्थिंग पिट बनाते है तो ये बात ध्यान में रखनी होती है कि इसकी लाइफ बड़ी होनी चाहिए, तो अर्थिंग पिट की लाइफ बढ़ाने और इसका प्रतिरोध कम बनाये रखने के लिए अर्थिंग पिट में चारकोल और नमक का इस्तेमाल किया जाता है।

चारकोल और नमक ही क्यों

अब चारकोल और नमक का ही क्यों इस्तेमाल करते हैं, इसके लिए चारकोल और नमक दोनो के स्वभावके बारे में समझना होगा। जब नमक मिट्टी की नमी के साथ मिलता है तो ये एक इलेक्ट्रोलाइट की तरह काम करता है जोकि मिट्टी की चालकता (Conductivity) को बढ़ाता है, जिस से मिट्टी में ज्यादा करंट बहने लगता है।

तो नामक के कारण चालकता (Conductivity) बढ़ जाती है तो चारकोल का क्या काम होता है, तो देखिए रेज़िस्टेंस लेवल क्या होता है हमें सिर्फ मिट्टी की चालकता को बढ़ाना ही नहीं होता है हमें मिट्टी की चालकता को आगे तक मेंटेन यानी बना के भी रखना होता है जिसके लिए हमें चारकोल की जरूरत होती है।

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चारकोल का ज्यादातर हिस्सा कार्बन से बना होता है और कार्बन इलेक्ट्रिसिटी का बहुत ही अच्छा चालक होता है। तो ऐसे में नमक इलेक्ट्रोलाइट का काम करता है और चारकोल एक कंडक्टर की तरह काम करता है, जिस से मिट्टी की चालकता बढ़ जाती है। इस तरह से नामक और चारकोल दोनों मिलके अर्थ रेजिस्टेंस को एक लेवल पर मेंटेन करने में हमारी सहायता करते हैं।

अर्थिंग पिट बनाते समय हम नमक और चारकोल का इस्तेमाल करते हैं और उसके बाद हम समय समय पे अर्थिंग पिट में पानी और नामक का घोल डालते रहते हैं ताकि मिट्टी की नमी कम ना होने पाए।

निष्कर्ष

तो जैसा कि हमने इस पोस्ट में बताया है इसको पढ़के आप समझ गए होगे कि हम प्रतिरोध को कम करके चालकता को बढ़ाने के लिए अर्थिंग पिट में नमक और चारकोल डालते हैं। इलेक्ट्रिकल की और अधिक जानकारी के लिए आप हमारे ब्लॉग पे और ज्यादा पोस्टों को पढ़ सकते हैं।

एंटी-माइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) पर तीसरा वैश्विक उच्च-स्तरीय सम्मेलन 2022

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री डॉ. भारती प्रवीण पवार ने ओमान के मस्कट में आयोजित तीसरे एंटी-माइक्रोबियल प्रतिरोध पर आयोजित सम्मेलन (Global High-Level Conference on Anti-Microbial Resistance) में भाग लिया।

अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि “रोगाणुरोधी प्रतिरोध (एंटी-माइक्रोबियल रेजिस्टेंस – AMR ) एक ऐसी अप्रकट और अदृश्य महामारी है जिसे अन्य प्रतिस्पर्धी सार्वजनिक स्वास्थ्य प्राथमिकताओं से कम नहीं किया जा सकता है। इस कार्यक्रम में चतुष्पक्षीय (क्वाडरीपार्टाइट) संगठनों द्वारा AMR पर मल्टी-स्टेकहोल्डर पार्टनरशिप प्लेटफॉर्म का शुभारंभ किया गया।

एंटी-माइक्रोबियल प्रतिरोध (Anti-Microbial Resistance – AMR)

एंटी-माइक्रोबियल (Anti-Microbial ) – एंटीबायोटिक्स, एंटीवायरल, एंटीफंगल और एंटीपैरासिटिक्स सहित – मनुष्यों, जानवरों और पौधों में संक्रमण को रोकने और उनका इलाज करने के लिए उपयोग की जाने वाली दवाएं हैं।

एंटी-माइक्रोबियल प्रतिरोध (Anti-Microbial Resistance – AMR) तब होता है जब बैक्टीरिया, वायरस, फंगस और परजीवी समय के साथ बदलते रहते हैं और दवाओं का उन पर कोई असर नहीं होता जिससे संक्रमण का इलाज करना कठिन हो जाता है और बीमारी फैलने, गंभीर बीमारी और मृत्यु का खतरा बढ़ जाता है। दवा प्रतिरोध के परिणामस्वरूप, एंटीबायोटिक्स और अन्य रोगाणुरोधी दवाएं अप्रभावी हो जाती हैं और संक्रमण का इलाज करना मुश्किल या असंभव हो जाता है।

AMR एक वैश्विक स्वास्थ्य और विकास खतरा है। सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को प्राप्त करने के लिए तत्काल बहुक्षेत्रीय कार्रवाई की आवश्यकता रेज़िस्टेंस लेवल क्या होता है है। WHO ने AMR को मानवता के समक्ष शीर्ष 10 वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरों में से एक माना है।

दवा प्रतिरोधी रोगजनकों के लिए एंटी-माइक्रोबियल दवाओं का दुरुपयोग और अधिक सेवन मुख्य करक हैं।

साफ पानी और स्वच्छता की कमी और अपर्याप्त संक्रमण रोकथाम और नियंत्रण माइक्रोब्स के प्रसार को बढ़ावा देता है, जिनमें से कुछ एंटी-माइक्रोबियल उपचार के लिए प्रतिरोधी हो सकते हैं।

अर्थव्यवस्था पर AMR का नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। मृत्यु और विकलांगता के अलावा, लंबे समय तक बीमारी के परिणामस्वरूप लंबे समय तक अस्पताल में रहना पड़ता है, प्रभावित लोगों के लिए अधिक महंगी दवाओं को खरीदना पड़ता है। इसे व्यक्ति और परिवार के साथ समग्र रूप से देश की अर्थव्यस्था प्रभवित होती है। ऐसा इसलिए भी कि कामकाजी आबादी का हिस्सा उत्पादक कार्यों में लगने के बजाय अस्पताल के बिस्तर पर रहने को मजबूर होता है और उसके साथ उसका परिवार भी उस चक्र का शिकार होता है।

क्या होता है दवा प्रतिरोधी टीबी (Drug-Resistant TB)?

दवा प्रतिरोधी TB तब विकसित होती है जब टीबी की लंबी, जटिल, दशकों पुरानी दवा को अनुचित तरीके से लिया जाता है, या जब लोग ऐसे अन्य लोगों से टीबी संक्रमित हो जाते हैं, जो दवा प्रतिरोधी TB का मरीज है। दवा प्रतिरोधी TB के निम्नलिखित प्रकार हैं:

मोनो-रेसिस्टेन्स (Mono-resistance) : केवल प्रथम-पंक्ति की एक एंटी-टीबी दवा के खिलाफ प्रतिरोध देखा जाता है।

पॉली-रेसिस्टेन्स (Poly-resistance): आइसोनियाज़िड और रिफैम्पिसिन को छोड़कर प्रथम-पंक्ति की एक से अधिक एंटी-टीबी दवा का प्रतिरोध देखा जाता है।

मल्टी-ड्रग रेसिस्टेन्स (MDR): कम से कम आइसोनियाजिड और रिफैम्पिसिन दोनों के खिलाफ प्रतिरोध देखा जाता है।

एक्सटेंसिव ड्रग रेसिस्टेन्स (XDR): किसी भी फ्लोरोक्विनोलोन के खिलाफ प्रतिरोध और मल्टीड्रग प्रतिरोध (MDR) के अलावा कम से कम तीन सेकेंड-लाइन इंजेक्शन योग्य दवाओं (कैप्रोमाइसिन, केनामाइसिन और एमिकासिन) में से एक के खिलाफ प्रतिरोध देखा जाता है।।

रिफैम्पिसिन रेसिस्टेन्स (RR): इसमें मोनो-प्रतिरोध, पॉली-प्रतिरोध, MDR या XDR के रूप में रिफैम्पिसिन का कोई भी प्रतिरोध शामिल है।

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